

दुद्धी सोनभद्र (राकेश कुमार कन्नौजिया)__
श्री राजा बरियार शाह खेल मैदान, महुली में चल रहे श्रीरामलीला महोत्सव के दसवें दिन मंगलवार को धार्मिक आस्था और भक्ति से परिपूर्ण मंचन प्रस्तुत किया गया। इस दिन की लीला में विभीषण शरणागत और अंगद रावण संवाद के जीवंत प्रसंगों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रामलीला का मंचन रावण दरबार से प्रारंभ हुआ। यहाँ रावण अपने बल और सामर्थ्य का प्रदर्शन करता है। इसी बीच विभीषण का आगमन हुआ, जिन्होंने रावण को माता सीता को लौटाने और श्रीराम की शरण में आने की सलाह दी। लेकिन रावण ने उनकी एक न सुनी और उन्हें अपमानित कर दरबार से निकाल दिया। तत्पश्चात विभीषण ने प्रभु श्रीराम की शरण ग्रहण की। भगवान श्रीराम ने उन्हें गले लगाकर स्वीकार किया और भविष्य में लंका का राजा बनाने का वचन दिया।
इसके बाद समुद्र तट का दृश्य मंचित किया गया। वानर सेना के प्रयास और श्रीराम की भक्ति से प्रसन्न होकर समुद्र देव का प्रकट होना तथा सेतु निर्माण की सहमति का प्रसंग दर्शकों के लिए अत्यंत रोचक और भावपूर्ण रहा।
अगला दृश्य था अंगद का रावण दरबार में आगमन। श्रीराम ने अंगद को शांति-दूत बनाकर रावण के पास भेजा। अंगद ने रावण को समझाया कि वह प्रभु श्रीराम की शरण ले और माता सीता को लौटाए। लेकिन रावण अहंकार में डूबा रहा। तभी अंगद ने सभा में अपना पैर गाड़ दिया और चुनौती दी कि यदि कोई उसका पैर हिला दे तो वह लौट जाएगा। रावण के मंत्री और योद्धा असफल रहे। जब स्वयं रावण अंगद का पैर पकड़ने आगे बढ़ा, तो अंगद ने अपना पैर खींच लिया और रामदल में लौटकर आगामी युद्ध की घोषणा कर दी। इस दृश्य पर पंडाल जयकारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इस मौके पर रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल, उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया, दिलगज राम कन्नौजिया, बुधनाथ कन्नौजिया, अमानुल्लाह, शारदा प्रसाद, रामनरेश कन्नौजिया सहित हजारों दर्शक मौजूद रहे और पंडाल खचाखच भरा रहा।
अंत में रामलीला मंडली के व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया ने जानकारी दी कि अगली कड़ी में लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध, मेघनाथ वध और सुलोचना विलाप का मंचन किया जाएगा।









